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  • Against Austerity: A Crucial Reference Point for the Left

    By Alan Sears

    Review of Richard Seymour, Against Austerity: How We Can Fix the Crisis They Made (Pluto Press, 2014)

    Richard Seymour’s new book is an unflinching and insightful analysis of the current situation in which the radical left finds itself. These are hard times for radicals in Northern Europe and North America. You would think this would be a period of mass radicalization, given the glaring inequality being produced by blatant attacks on social programs, wages, migrants’ rights and job security. Yet there are few effective fightbacks, and activist circles in some places are actually getting smaller.

  • May 9 : Intellectuals condemn Saibaba’s arrest

    http://www.deccanherald.com/content/405630/intellectuals-condemn-saibaba039s-arrest.html Intellectuals condemn Saibaba’s arrest New Delhi: May 9, 2014 DHNS Intellectuals and teachers, including Arundhati Roy, on Friday, condemned the arrest of English professor G N Saibaba on charges of alleged involvement in Maoist activities, saying it was “arbitrary and illegal” and an attempt to stifle voice of dissent. In a statement, the intellectuals […]

  • Thomas Piketty’s Capital in the Twenty-first Century – some critical commentaries

    [“Capital in the Twenty-First Century”, a new book by French economist, Thomas Piketty, has taken the English language world of letters by storm. Built on painstaking research spanning more than a decade, Capital in the Twenty-First Century presents a a vivid picture on changes in wealth and income inequality since the Industrial Revolution. Using tax-returns […]

  • India: Protest the Clandestine Abduction of G.N. Saibaba by Maharashtra Police

     

    PROTEST DEMONSTRATION against clandestine abduction of Dr. G Naga Saibaba by Maharashtra Police at Maharashtra Sadan, Kasturba Gandhi Marg, on 10th May (SATURDAY) at 11 am

    Condemn the dastardly clandestine abduction of Dr. GN Saibaba, Joint-Secretary of Revolutionary Democratic Front by the Maharashtra Police. Today, the 9th of May, plain-clothed personnel of the Maharashtra Police

  • May 9: Myth of the safe scribe

    http://www.openthemagazine.com/article/nation/myth-of-the-safe-scribe#.U2p3LZG3aJg.gmail Myth of the safe scribe Garga Chatterjee On 19 April, bullets fired by ‘unknown’ gunmen injured Hamid Mir, the acclaimed Pakistani journalist, columnist and political talk-show host for Geo TV. His brother alleges that Pakistan’s intelligence agency ISI is behind the attack. Known to be a strong votary for democratic rule in Pakistan and […]

  • May 9: American Manuwadis not so different verbal diarrhea

    http://dalitnation.wordpress.com/2012/08/30/rajiv-malhotra-american-manuwadis-not-so-different-verbal-diarrhea/ Rajeev Malhotra: American Manuwadi’s not so different verbal diarrhea Rajeev Malhotra the billionaire Brahmin businessman from Princeton is the latest darling of Hindutva and Manuwadis. Several Dalit intellectuals have expressed to us that they have been troubled after reading his books ‘Breaking India’ and ‘Being Different’. And some have felt that their whole Dalit […]

  • Benares Grapevine-4: रोडशो का झूठ और झाड़ू चलने का डर

    माना जा रहा है कि नरेंद्रभाई मोदी बनारस से जीत रहे हैं, लेकिन उनकी जीत का जश्‍न मनाने वाले इस शहर में इतने भी नहीं कि बीएचयू गेट से रविदास गेट तक की सड़क को जाम कर सकें। कल पूरा का पूरा शहर धारा 144 की गिरफ्त में था और हजारों अडि़यों पर दर्जनों लोगों के भगवा झुंड कानून को ठेंगा दिखा रहे थे। शहर में कल तीन सहूलियतें थीं। पहली, बाइक पर भाजपा का झंडा या पोस्‍टर लगाकर कोई पांच लोगों को भी बैठाकर धूल उड़ा सकता था। दूसरी, टीवी पर आई जाम और भीड़ की खबरों का बहाना बनाकर कोई भी स्‍थानीय नागरिक अपने काम से कटने की मौज ले सकता था। तीसरी सहूलियत ये रही कि इस भीड़ के बहाने अफ़वाहों का बाज़ार पर्याप्‍त गरम हो गया और किसी के पास किसी भी ख़बर की  पुष्टि करने का वक्‍त ही नहीं बचा।

    तो पहली ख़बर लंका स्थित टंडनजी की अड़ी पर उड़ते-उड़ते ये पहुंची कि कांग्रेस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा भारतीय जनता पार्टी में चले गए हैं। वहां सनातन मौजूद मन से समाजवादी और चोले से कांग्रेसी जनता ने इसे अपेक्षित बताते हुए दो-चार गालिया मिश्रा को जड़ दीं और पहले की तरह नरेंद्रभाई के आगमन की प्रतीक्षा में लीन हो गई। चाय पर चाय और पान पर पान भिड़ाती जनता को मोदीजी का बेसब्री से इंतज़ार था। उनके आने से पहले पर्याप्‍त मनोरंजन हुआ। पहला दृश्‍य टीएमसी की प्रत्‍याशी इंदिरा तिवारी का था, जो बदहवास सी भागती हुई पैदल ही लंका से निकल लीं। उनके निकलने के बाद भाजपाइयों के हमले की खबर आई। इसके बाद अचानक नूपुर शर्मा अकेली टहलती हुई दिखाई दीं। एक सज्‍जन ने उन्‍हें पहचान लिया और बोले, ”बनारस में बाहर का आदमी कितना अकेला होता है। देखिए, इसको पहचानने वाला भी यहां कोई नहीं।” पीछे-पीछे नलिन कोहली दर्जन भर मुश्‍टंडों से घिरे झुके चले आ रहे थे। तपती सड़क और आग बरसाते आकाश के बीच उनकी खल्‍वाट खोपड़ी और चेहरा टमाटर की तरह दिखता था। सज्‍जन ने फिर दुहराया, ”कितनी मेहनत करनी पड़ रही है बेचारों को। इससे तो बेहतर होता कि मोदी को सीधे राज्‍यसभा में भेजकर प्रधानमंत्री बना देते।” यह बात कुछ लोगों को जंच गई। पपीता बेच रहे एक ठेलेवाले ने झट से कहा, ”हां यार, ई काहे चुनाव लड़त हौ सरवा? झुट्ठो एतना मेहनत…।”

    मोदी के चुनाव लड़ने के औचित्‍य पर चर्चा शुरू हो चुकी थी और मालवीयजी की मूर्ति के पास कुछ हलचल सी हो रही थी। देखा कि दो-चार बड़ी-बड़ी गाडि़या धड़धड़ाते हुए रविदास गेट की तरफ निकलीं। इनमें अमित शाह और अरुण जेटली बैठे थे। कांग्रेसियों का मानना था कि प्रोग्राम खतम हो गयल। भाजपाइयों का कहना था कि मोदीजी के लेवे ई कुल जात हउवन। एक पत्रकार ने बताया कि  मोदीजी तो अभी शहर में आए ही नहीं हैं। इन गाडि़यों के काफिले के पीछे ढेर सारे समर्थक दौड़ पड़े। सबको लगा कि कुछ होने वाला है। कुछ मोटरसाइकिलें भी चल पड़ीं। रविदास गेट तक जाकर सब वापस आ गए। दोबारा जूस-वूस पीकर नारे लगाने लगे। मोदी को आने में अभी देर थी।

    सूरज चढ़ चुका था। माथा भनभना रहा था। हर ओर भगवा माहौल था। अचानक परिदृश्‍य में सर्वश्री शैलेंद्र सिंह माथे पर फेटा बांधे प्रकट हुए और उन्‍होंने सूचना दी कि स्‍वयंवर वाटिका में रामाज्ञा राय का फासीवाद विरोधी सम्‍मेलन चल रहा है। हमने उनसे चलने का आग्रह किया तो बोले कि वे तो नोटा पार्टी के हैं, इसलिए फासीवाद से उन्‍हें कोई मतलब नहीं। और बगल में पिच्‍च से थूकते हुए अपना गमछा खोलकर उन्‍होंने पेट पर बांध लिया। हमने सोचा क्‍यों न एक बार स्‍वयंवर वाटिका हो आवें। पहुंचे तो रांची से तीन  गाडि़यां बदल कर यहां आए आलोचक रविभूषणजी का वक्‍तव्‍य चल रहा था। करीब दो दर्जन लोगों की इस प्रतिरोध सभा में कुछ देर तो पालथी मार कर बैठा गया, लेकिन पिछले दिन की तरह नींद के झोंके आने से पहले ही मैं सतर्क होकर उठ गया। कुर्सी पर जाकर बैठा तो फिर प्रेमपाल शर्मा ने बोलना शुरू किया। फिर नींद आने लगी। अचानक कान में मोबाइल कैमरा क्लिक होने जैसी आवाज़ आई। आंख खोलते ही सामने अविनाश दास दिखे। वे हमेशा मेरी ऐसी ही तस्‍वीरों की खोज में रहते हैं। मुझे जगा देखकर वे हंस दिए। मैं उठकर निकल लिया।

    चायपान कर के लौटा तो सभा तकरीबन खतम हो चुकी थी। कुछ लोगों से बात-मुलाकात हुई। रामाज्ञा जी खुश दिख रहे थे। उन्‍होंने अपने वक्‍तव्‍य में कहा भी था कि जब बाहर पूरी सड़क पर फासीवाद उतरा पड़ा है, इस शहर के बुद्धिजीवी यहां पर उसके विरोध का ऐतिहासिक हस्‍तक्षेप कर रहे हैं। लोगों ने इस बयान पर गड़गड़ा दिया था। कार्यक्रम खतम होते ही हम बाहर निकले तो आकाश में एक हेलीकॉप्‍टर मंडराता दिखा। लगा कि कुछ होने वाला है। तभी मेरे एक बनारसी मित्र का फोन आया। वह अपने एक भगवाधारी साधु मित्र के साथ मोदीजी के दर्शन करने आया था हेलीकॉप्‍टर का पीछा करते-करते। उसका अंदेशा सही था। मोदी बीएचयू में उतर चुके थे। हम वैशाली स्‍वीट्स के पास यानी रविदास गेट और बीएचयू गेट के मध्‍य में खड़े थे। बाईं ओर अरविंद केजरीवाल की सफेद सभा सज रही थी। दाईं तरफ से मोदीजी आने वाले थे। बीच की खाली सड़क पर रह-रह कर मोदीभक्‍तों के जत्‍थे पैदल या बाइकों से माहौल बना रहे थे।

    अचानक सड़क के दोनों तरफ की जनता ऊंचे से डिवाइडर पर जमने लगी। हमने भी मौका देखकर कसरत कर डाली और खुद को डिवाइडर पर टिका लिया। पहले कहा गया कि मोदीजी रॉंग साइड यानी सड़क की दूसरी तरफ से आने वाले हैं। करीब किलोमीटर भर लंबी कतार उधर मुंह कर के खड़ी हो गई डिवाइडर पर। फिर किसी ने हवा बनाई कि नहीं, वे राइट साइड से ही आएंगे। अचानक यह खबर कानोकान फैली और किलोमीटर भर लंबी कतार राइट की ओर मुड गई। आशंका सही साबित हुई जब जैमर आता दिखा। हूटर बजा। सड़क के किनारे कुछ मोटी और गोरी मध्‍यवर्गीय महिलाएं खड़ी थीं। जैसे जंग से फौज लौट रही हो और उसका स्‍वागत करना हो, कुछ ऐसा नज़ारा था। मोदी आए। आए और निकल गए। खिड़की से उनके सिर की एक झलक मिली। मोदी आगे-आगे, जनता पीछे-पीछे। रविदास गेट पर  मोदी के पहुंचते ही सफेद फौज ने नारा लगाया, ”जो हिटलर की बात करेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा।” मोदी की गाड़ी अटक चुकी थी और यह नारा पारे की तरह उनके कान में घुलता जा रहा था। सारे भाजपाई मना रहे थे कि जल्‍दी सफेद टोपी वाले हटें और मोदीजी निकल पाएं।

    मोदी को निकलना था, सो वे निकल लिए। पहली बार उन्‍हें अपने खिलाफ़ नारे सुनने पड़े। इसके बाद लंका तो क्‍या, बनारस से भगवा रंग साफ़ हो गया। जनता जान गई कि ये रोड शो नहीं था क्‍योंकि मोदीजी गाड़ी के भीतर बैठे थे और जनता को अपने पीछे दौड़ा रहे थे। टीवी ने इसे रोड शो बताया। आज तक की इलेक्‍शन एक्‍सप्रेस नामक लाल वाली बस के ऊपर भाजपाइयों की बैठक हो रही थी और एक कैमरामैन ड्रोन कैमरा उड़ा-उड़ा कर भीड़ को पचास हजार साबित करने पर तुला था। पांच हजार से भी कम लोग अपने-अपने ठिकानों की ओर जा चुके थे। कहीं कोई जाम नहीं लगा। सड़कें राहत भरी थीं। शहर पहले जैसा था। मोदीजी गाड़ी के भीतर बैेठे रह गए।

    शहर की आखिरी बहस इस बात को लेकर थी कि क्‍या मोदीजी के रोड शो से भाजपा के वोट बढ़े हैं या कम हुए हैं। गोदौलिया पर एक पुराने बनारसी विद्वान सुरेंद्र सिंह ने मास्‍टर स्‍ट्रोक जड़ा, ”कइसन रोड शो? गडि़या से बाहर निकल के देखतन, त समझ  में आवत कि के उनके बचावेला। हम्‍मे त डर लगत हौ भाय कि कहीं झाड़ू न चल जाए ए शहर में…।”

    झाड़ू चलने का डर रात से पैदा हो चुका है। बनारस के भाजपाई अपने-अपने घरों में हैं। जो भगवा दिख रहा है, सब बाहर का है।

    अगली किस्‍त 
    पहली किस्‍त 
    दूसरी किस्‍त 
    तीसरी किस्‍त 

  • London – Discussion Meeting on “State, Law and Detention – State of Democratic Rights in India”, May 9

    We invite you to a meeting on “State, Law and Detention – State of Democratic Rights in India” Friday 9 May 2014, 6.30pm at Doughty Street Chambers, 53-54 Doughty St, London WC1N 2LS Two guest speakers from India Sanober Keshwaar and Susan Abraham will talk about the Increased use of draconian detention laws and the […]

  • महान, मध्य प्रदेश में पुलिसिया दमन के बाद वन सत्याग्रही गिरफ्तार

    मई, 8, सिंगरौली, मध्य प्रदेश। धमकियों और घटिया रणनीति के तहत की गई ग्रीसपीस और महान संघर्ष समिति के चार कार्यकर्ताओं के गिरफ्तारी के बावजूद 150 से अधिक ग्रामीण एस्सार के नाजायज कोल खदान के प्रस्ताव के विरोध में सिंगरौली जिला स्थित महान जंगल में संघर्ष जारी रखे हुए हैं।

    पुलिसिया हमले के खिलाफ विभिन्न संगठन, पत्रकार व बुद्धिजीवि महान संघर्ष समिति के समर्थन में आये तथा किया एस्सार कम्पनी का विरोध
    समाजवादी जन परिषद ने और जन संघर्ष मोर्चा से जुड़े विभिन्न जन-संघठनों, जैसे: किसान आदिवासी संगठन, जागृत आदिवासी दलित संगठन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, श्रमिक आदिवासी संगठन, बरगी बांध विस्थापित संघ, महिला गैस पीड़ित उद्योग संगठन, म. प्र. महिल मंच, नारी जागृती मंच, बघेलखंड आदिवासी मुक्ती मोर्चा ने, म. प्र. के सिंगरौली जिले में ग्रीन-पीस और महान संघर्ष समीति के कार्यकर्ताओं कि गिरफ्तारी और पुलिस थाने में मारपीट कि घटना के लिए म. प्र. सरकार कि तीव्र निंदा की है और इन कार्यकर्ताओं कि तुरंत रिहाई और दोषी वनकर्मी और कम्पनी के लोगों पर कार्यवाही कि मांग की है.

    जनसंगठनों ने आज जारी विज्ञप्ती में कहा कि, म. प्र सरकार महान कोल फील्ड लिमिटेड के ईशारे पर कार्यवाही कर रही है. ग्रीन-पीस और महान संघर्ष समीति के कार्यकर्त्ता महान के जंगल में पेड़ कि क्लियर फेलिंग का इस आधार पर विरोध कर रहे थे कि, अभी-तक न तो फारेस्ट राइट एक्ट के तहत महान के जंगल पर लोगों के अधिकार तय करने कि प्रक्रिया शुरु हुई है, और ना ही पहले दौर में लगाई गई अनेकों पर्यावरणीय शर्तों का अनुपालन ही हुआ है.

    इस सबके बावजूद जब स्थानीय फारेस्ट डिपार्टमेंट कम्पनी के अधिकारीयों और गुंडों के साथ मिल जबरदस्ती पेड़ों कि मार्किंग और कटाई का काम शुरू कर रहे थे, तो लोगों ने विरोध किया. जब विरोध के चलते वो लोग अपनी-अपनी मशीनें झोड़ भाग गए, तो लोगों ने एक पंचनामा बना ५ मई को पुलिस और अन्य अधिकारीयों को इस बात कि सूचना दे दी. इस सबके बावजूद ग्रीन-पीस के अक्षय और विनीत गुप्ता और महान संघर्ष समीति के बैचेनलाल साहू और विजय शंकर को रात के १२ बजे बैढन में गईं पेस के दफ्तर से बिना कोई कारन बाते उठा लिया. दुसरे दिन मालूम हुआ कि, उन्हें धारा ३५३, १८६, ३९२ और १८०/१४ के तहत; डैकेती , मारपीट और सरकारी काम में अडंगे के आरोप में गिरफ्तार किया है. उन्होंने यह भी बताया कि उनसे कबूलनामा पर हस्ताक्षर लेने के लिए पुलिस स्टेशन में मारा गया.

    अमेलिया गांव के निवासी और एम एस एस के सदस्य हरदयाल सिंह ने कहा ” वे हमें इन गंदी चालों से नहीं डरा सकते। हम दूसरे कई जगहों के आन्दोलनकारी भाइयों और बहनों से प्रभावित हैं जो जगह-जगह अपना आंदोलन चला रहे हैं। हम अपनी गिरफ्तारी, शारीरिक हिंसा या अन्य किसी तरह की यातना से डरते नहीं हैं। हम अपनी लड़ाई को जारी रखेगें  और किसी भी परिस्थिति में जंगल छोड़कर नहीं जाएगें।  हमें विश्वास है कि हम जीतेगें और हमें न्याय मिलेगा।”

    स्थानीय पुलिस ने आधी रात में चार प्रदर्शनकारियों को सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने  और डकैती का बेतुका आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले भी ग्रीनपीस के एक कार्यकत्ता को पुलिस ने पीटा गया था जब उन्होंने एक जाली दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था।  इस साल के फरवरी से वे लोग वन सत्याग्रह कर रहे हैं।  उन्हें जमानत देने से इंकार कर दिया गया है और वैढ़न में न्यायिक हिरासत में रखा गया है।

    पिछले कुछ दिनों से एम एस एस के सदस्य वन विभाग और एस्सार के अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि कोल खदान के लिए रास्ता साफ करने के लिए जिस तरह से जंगलों की कटाई हो रही है उसपर तत्काल रोका लगाई जाय। मोटेतौर पर एक अनुमान है कि खदान के लिए रास्ता बनाने में लगभग पांच लाख से अधिक पेड़ों को काटना पड़ेगा और वन क्षेत्र के 54 गांवों के तकरीबन पचास हजार लोगों की जीविका इससे प्रभावित होगी।
    ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आइच ने कहा, ” हम स्थानीय लोगों के दृढ़विश्वास से बहुत प्रभावित हैं और अब महान में एस्सार द्वारा किए जा रहे के गलत कामों को बेनकाब करने के लिए कृतसंकल्प हैं। वे हमारी प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहे हैं। एस्सार ग्रीनपीस द्वारा स्थानीय लोगों को सशक्त बनाने की ईमानदार कोशिश को दुर्भावनापूर्ण इरादे से बदनाम कर रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जो कोई भी एस्सार के कोल खदान के खिलाफ काम करेगा उसके खिलाफ हताश होकर उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का अभियान चलाएगा। “

    सोमवार को हुए उस प्रदर्शन के 48 घंटे के भीतर ही चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है जिसमें एम एस एस के लोगों के अलावा  महिलाएं भी शामिल थी। प्रदर्शनकारी एस्सार और वन विभाग के अधिकारियों के सामने पेड़ों को काटने के लिए लगा रहे निशान का विरोध कर रहे थे।  ग्रीनपीस के जिन दो एक्टिविस्टों अक्षय और विनीत गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है वे  तो सिर्फ अपने कैमरा से पेड़ों पर लगाए जा रहे निशान का फोटो ले रहे थे।

    ग्रीनपीस की सीनियर कंपैनर प्रिया पिल्लई ने कहा, “आखिर उनलोगों की गिरफ्तारी क्यों हुई जो सिर्फ फोटोग्राफी कर रहे थे। क्या एस्सार को इस बात का डर था कि इससे उसके अनैतिक क्रिया-कलापों का खुलासा हो जाएगा। ये सभी इस बात का प्रमाण है कि एस्सार अपने हित के लिए स्थानीय लोगों के शांतिपूर्वक विरोध के अधिकार को खत्म कर देना चाहती है। “

    ग्रीनपीस की कंपैनर प्रिया पिल्लई का कहना है कि जिस हड़बड़ी में गिरफ्तारी की गई वह अभूतपूर्व है। उनका कहना था, ” स्थानीय पुलिस तो इस तरह से काम ही नहीं करती है। वह इतनी तेज गति से कभी काम नहीं करती। एम एस एस के सदस्य ग्राम सभा में हुई गड़बड़ियों के मामले को पिछले दो महीने से उठा रहे हैं लेकिन पुलिस मामले पर कंुडली मारकर बैठी है और इस मामले में अभी तक कुछ नहीं की है। एस पी से मिलने के बावजूद अभी तक इस मामले में एफ आई आर तक दर्ज नहीं हुआ है। ”  ऐसा लगता है कि सरकार वहां जल्दी से जल्दी खनन शुरु करवाना चाहती है।

    इस साल फरवरी में, महान के दूसरे चरण के वन मंजूरी (अंतिम चरण निकासी)  के बाद  महान के जग नारायण साह ने 6 मार्च  2013 के फर्जी ग्राम सभा की मंजूरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी । उसके बाद एक बड़ी रैली में जिसमें 14 से अधिक गांवों के लोगों ने वन सत्याग्रह शुरू करने का निर्णय लिया और उस परियोजन को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करने का संकल्प लिया था। जिलाधिकारी ने अधिकारिक रूप से यह घोषणा भी की थी कि वे इस मामले को नए सिरे से ग्राम सभा की बैठक बुलाकर देखेगें।

    वन सत्याग्रह लगातार मजबूत हो रहा है क्योंकि इसमें शहरी इलाके से कार्यकर्ता आकर स्थानीय लोगों के साथ जुड़ रहे हैं। पिछले महीने बाहर से आए कई कार्यकर्तागण जंगलों में १५ दिन रूककर स्थानीय समुदाय के लोगों को महुआ बीनने में मदद कर रहे थे।

    ग्रीनपीस और एम एस एस इस घटिया हरकतों के सामने घुटने नहीं टेकेगी।  ग्रीनपीस वन मंजूरी को रद्द करने की मांग पर कायम है।