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  • James Connolly is best honoured by struggle against Capitalism and Imperialism and the bourgeois cosmopolitanism on the Left

    5 June 1868 – 12 May 1916

    Democracy and Class Struggle says James Connolly can best be remembered by struggling against Capitalism and Imperialism.

    Especially the fight against bourgeois cosmopolitanism on the Left which we detest along with Comrade Connolly..

    See our articles carrying forward James Connolly’s fighting contribution on the National Question Today.

    http://

  • INDIA: CONDEMN AND EXPOSE THE FRAME UP OF DELHI UNIVERSITY PROFESSOR GN SAIBABA! : RELEASE PROF. GN SAIBABA UNCONDITIONALLY

     

    COMMITTEE FOR THE RELEASE OF POLITICAL PRISONERS
    185/3,FOURTH FLOOR, ZAKIR NAGAR, NEW DELHI-110025

     

     
                                                                                                                                                  Date:10/05/2014

    But, because I tried to extend your liberties
    Mine were curtailed.
    Because I tried to rear the temple of freedom
    For you

  • भगाणा में अन्याय, अनसुनी आवाजें और आत्महत्या की एक कोशिश


    कल (11 मई) जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन की यह रिपोर्ट पोस्ट करते हुए एक दुखद सूचना यह भी है कि एक शिकायतकर्ता किशोरी के चाचा ने अपने गांव लौट कर आत्महत्या करने की कोशिश की है. वे आज सुबह पांच बजे अचानक भगाणा के लिए निकल गये थे। गांव में ही उन्‍होंने दोपहर बाद दो बजे कीटनाशक खाकर आत्‍महत्‍या करने की कोशिश की। उन्‍हें पहले हांसी हॉस्‍पीटल में एडमिट करवाया गया, जहां से चिकित्‍सकों ने उन्‍हें रोहतक अस्‍पताल में रेफर कर दिया है। उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। गांव वालों का कहना है कि आत्‍महत्‍या से पहले वे कह रहे थे कि इज्‍जत तो चली गयी, अब क्‍या बच गया है। कहीं से कुछ नहीं मिलने वाला है।

    नई दिल्ली, 11 मई। हरियाणा के भगाणा गांव में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई चार नाबालिगों के हक में न्याय की मांग के समर्थन में आज शिकायतकर्ताओं के साथ भारी संख्या में दिल्ली के सामाजिक कार्यकता, बुद्धिजीवी और विद्यार्थी भी जुटे।  यहां दिल्ली में पंत मार्ग पर स्थित हरियाणा के मुख्यमंत्री आवास पर धरना देते हुए आंदोलनकारियों ने शिकायतकर्ताओं के प्रति हरियाणा सरकार के रवैए की तीखी आलोचना की और कहा कि ऐसा लगता है कि हरियाणा सरकार सामंती उत्पीड़नकर्ताओं के पक्ष में खड़ी हो गई है और दलितों-पीड़ितों की आवाज को जानबूझ कर दफन किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर जुटे लोगों ने यहां दिल्ली में सरकार और प्रशासन से यह मांग की कि पीड़ितों पर जुल्म ढाने वाले दोषियों को  सख्त सजा दी जाए और फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन कर शिकायतकर्ताओं को जल्द से जल्द इंसाफ दिलाई जाए।

    आंदोलनकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा से मिलना चाहते थे, लेकिन भारी संख्या में पुलिस बल ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के कई बैरिकेड तोड़ डाले और आक्रोश से भर कर वहीं हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। जब आंदोलनकारियों का गुस्सा नहीं थमा तो उनमें से दस लोगों के प्रतिनिधिमंडल को हरियाणा के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव सुरेंद्र दहिया से बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन उन्हें कार्रवाई का भरोसा नहीं दिया। इस पर आंदोलनकारियों का गुस्सा और क्षोभ और बढ़ गया तब फिर दुबारा सात लोगों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया, जिसने सुरेंद्र दहिया के सामने जोरदार तरीके से हरियाणा और खासकर भगाणा में दलितों पर होने वाले अत्याचारों का ब्योरा दिया और जल्द कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ पीड़ितों को मुआवजा देने और उनके पुनर्वास की मांग की। इसके बाद राजनीतिक सचिव की ओर से अगले बहत्तर घंटों के भीतर मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया।   

    विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने भगाणा की किशोरियों के सामूहिक बलात्कार में शामिल अपराधियों को संरक्षण देने वाले गांव के सरपंच और उसके साथियों को भी तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। भगाणा कांड सघर्ष समिति के प्रवक्ता जगदीश काजला ने कहा कि भगाणा की इन शिकायतकर्ता बच्चियों और परिवारों के साथ हुई यह घटना हरियाणा में दबंगों के आतंक की एक छोटी बानगी है। काजला ने कहा कि जिस गांव में दबंगों ने दलित परिवारों का सम्मान से जीना असंभव कर दिया है, वे वहां लौटना चाहते, इसलिए उन्हें वहां से अलग बसाने की व्यवस्था की जाए। शिकायतकर्ता बच्चियों में से एक की मां सोना ने कहा कि हरियाणा में हमें इंसाफ नहीं मिला तो हम दिल्ली के जंतर मंतर पर आए कि यहां हमारी आवाज सुनी जाएगी, लेकिन अब एक महीने होने जा रहा है, आज तक केंद्र सरकार या दिल्ली या फिर हरियाणा के प्रशासन या किसी नेता ने हमारा दुख समझने और यहां तक बात करने तक की भी कोशिश नहीं की। सोना ने आगे कहा कि हम देश और प्रशासन से पूछना चाहते हैं कि क्या दलितों का कोई सम्मान नहीं होता, उनकी बेटियां क्या बेटी नहीं होती हैं?

    भगाणा गांव की एक वृद्ध महिलाए गुड्डी ने कहा कि जिन बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ, उनके सम्मान और गरिमा के खिलाफ अपराध हुआ, वे खुद दिल्ली के जंतर मंतर पर न्याय की आस में बैठी है, लेकिन केंद्र या राज्य सरकार या किसी भी प्रशासन को इनकी बात सुनने की जरूरत महसूस नहीं हुई। विरोध प्रदर्शन के आखिर में भगाणा कांड संघर्ष समिति ने कहा है कि अगर इस मामले में शिकायतकर्ताओं के साथ न्याय नहीं हुआ, तो हम देशव्यापी आंदोलन छेड़ने के लिए तैयार हैं।


    भगाणा कांड संघर्ष समिति
    जगदीश काजला
    09812034593

  • Secretary of Labor Perez willing to meet with Rep. Boehner on Extended Unemployment Compensation (EUC)

    Washington, DC – Secretary of Labor Thomas Perez urged an immediate vote on bill to extend benefits for the long term jobless in a May 7 letter to Republican House Speaker John Boehner. Perez also stated that he was willing to meet with Boehner to discuss his questions and concerns about the legislation.

    The 14 Republican House members who participated in the May 9 Weekly Republican Address, titled “Many Bills, One Focus: Jobs,” made no mention of the bill on extended benefits for the unemployed.

    Republicans gained effective veto power over extended unemployment benefits when the Congressional Democratic leadership did not insist on the inclusion of Extended Unemployment Compensation (EUC) in the December 2013 budget compromise.

    Since extended benefits expired on Dec. 28, 2013, about 3 million workers have been cut off unemployment insurance.

    In the aftermath of the 2007 economic meltdown, the worst crisis of capitalism since the 1930s, large-scale unemployment has been a huge problem in the U.S. and Europe.

    In the U.S., California has an unemployment rate of 8.1%, Illinois 8.4%, Nevada is at 8.5% and Rhode Island has the highest unemployment rate, 8.7%.

  • Suniti Kumar Ghosh

    Suniti Kumar Ghosh, revolutionary communist and ideologue of the Naxalbari movement, passed away on May 11 evening, in Asansol, West Bengal. He was associated with the communist movement in India from the time of the Tebhaga movement, and later was a member of the All India Coordination Committee of Communist Revolutionaries, formed in the wake […]

  • Back to the Future – US State Department in 1937 support for Fascism – US State Department on Ukraine 2014

    A 1937 Report of the State Department’s European Division described the rise of Fascism as the natural reaction of “the rich and middle classes, in self-defense” when the “dissatisfied masses, with the example of the Russian revolution before them, swing to the Left.”

    Fascism therefore “must succeed or the masses, this time reinforced by the disillusioned middle classes, will again turn to the

  • Condemn the abduction of Dr. G.N. Saibaba! ICAWPI – Toronto

     

    On May 9th, 2014, Dr. G.N. Saibaba, an English professor at Delhi University, was in his car returning home to eat lunch. Dr. Saibaba has been an anti-imperialist activist for a number of years and is the joint convenor of the Revolutionary Democratic Front.

    He has spoken at a number of different political forums around the world about the issues that affect

  • End the Harassment of Anti-Racist Activists and Organizations in Norway! PCR-RCP Canada

    On April 28th, 2014, the Norwegian police arrested Kjell Gunnar Larsen, a Norwegian revolutionary communist and chief executive officer of the New SOS Racism. New SOS Racism is an organization dedicated to fighting the growth of racism and fascism in Norway, in particular the growth of white supremacist organizations.

    His house was raided and the police seized his personal belongings.

  • Ukrainian History Forgotten : The Donbass : Donetsk and Lugansk vote in 1994 for Federalisation

     

     

    Democracy and Class Struggle says in view of western media hostility to autonomy referendums in Lugansk and Donetsk today it is worth recalling a history which has been erased from 1994 of a similar vote for Federalisation that was not protested by the West but suppressed by the Kiev Government  who declared it illegal.
     

       

    20 years ago the most important event which few people

  • Benares Grapevine-5: मोंछू-मौलाना संवाद



    मोंछू के यहां मैंने पहली बार आज से करीब 14 साल पहले थम्‍स अप पीया था और उनके हाथ का लगा पान खाया था। उस वक्‍त उनकी मूंछें इतनी खूबसूरत नहीं हुआ करती थीं। वे इतने बूढ़े भी नहीं थे। बनारस छोड़ने के बाद जब-जब मैं लौटा और साकेत नगर कॉलोनी में रुका, उनके यहां पान खाया, लेकिन कभी भी उनसे- जिसे ”राब्‍ता” कहते हैं- नहीं बन सका। पिछले महीने बनारस में अरविंद केजरीवाल की रैली से पहले जब मैं आया था, तो मोंछू का बदला हुआ रूप मैंने पाया। गले में भारतीय जनता पार्टी का गमछा, सिर पर पार्टी की टोपी और दुकान के काउंटर पर ”मोदी को वोट क्‍यों दें” शीर्षक से लिखे परचों का गट्ठर। मैंने देखा कि हर नए ग्राहक को वे बातचीत में फंसाते और परचा बांटते थे। उनकी देह, लाल होंठ और उनके बीच मुस्‍कुराती मूंछें एक आकर्षण पैदा करती थीं। लोग उनसे बातचीत में बीच-बीच में निकलने वाली देसी प्रयोगात्‍मक गालियों के मुरीद हो जाते और सहज ही ”मोदी-मोदी” करने लगते। मोंछू खुलकर प्रचार कर रहे थे और भाजपा विरोधियों को रह-रह कर हड़का भी रहे थे। 


    इस बार 22 मई को जब मैं साकेत नगर कॉलोनी पहुंचा तो सुफलजी के घर यानी अपने दूसरे घर पर जाने से पहले मोंछू के यहां रुका। एक पान लगवाया। उन्‍होंने मुझे मोदी का परचा पकड़ाया और मुस्‍करा दिए। मैंने रात में लौटने की बात कह के विदा ली। वो रात संकटमोचन संगीत समारोह की आखिरी से पहले वाली रात थी। खचाखच भीड़, पान-पत्‍ते और राजनीतिक चर्चाओं के बीच रात दस बजे मैं संकटमोचन पहुंचा। मोंछू से पान लगवाया और भीतर घुस गया। सुबह होने तक कई बार मैं उनके पास गया। हर बार नींद से भारी पलकों और पान के लगातार सेवन से भरभराई आवाज़ में उन्‍हें किसी न किसी ग्राहक को गरियाते या समझाते पाया। अगली रात फिर डेरा जमा संकटमोचन संगीत समारोह में। पूरी रात मोंछू के यहां रह-रह कर बैठक होती रही। फिर समारोह खत्‍म हुआ और मोंछू का टाइम टेबल बदल गया। दुकान का रात भर खुलना रुक गया। वे या तो सुबह की पारी में मिलते या शाम को, वैसे ही मुस्‍कराते, प्रचार करते और विरोधियों का खून जलाते हुए। मेरी धारणा उनके बारे में प्रबल हो चुकी थी जिसमें किसी भी बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं थी। मैं जाता रहा, वे मुझे खबरें देते रहे और मैं सुन-सुन कर सिर्फ मुस्‍कराता रहा। मैंने उनके सामने मोदी के खिलाफ़ एक शब्‍द नहीं कहा पिछले बीस दिनों में। एक तो डर था उनकी गालियों का, दूजे खबरों का एक स्रोत कट जाने की आशंका भी रही।

    यह संयोग ही रहा कि 4 तारीख के बाद लगातार काम में जुट जाने और लहुराबीर के इलाके में मित्रों के साथ शिफ्ट हो जाने के कारण मैं चार दिन उनके यहां नहीं जा सका, लेकिन मित्र नवीन कुमार के शूट के सिलसिले में 9 की रात संकटमोचन जाना पड़ा जब अरविंद केजरीवाल की रैली खत्‍म हो चुकी थी और पूरा शहर एक सफेद सैलाब में तब्‍दील हो चुका था। रात दस बजे नवीन को संकटमोचन में कीर्तन शूट करना था। करीब घंटे भर का शूट रहा होगा। इस दौरान मैं मोंछू के यहां चला गया। वे देखकर मुस्‍कराए। मैंने थम्‍स अप मांगा और बैठ गया। उनके साथ एक मौलाना बैठे हुए थे। वे पान दबाए उनसे काफी देर से कुछ बातें कर रहे थे। जहां से मैं पकड़ पाया, वह अविकल संवाद नीचे दे रहा हूं:

    मौलाना: … त का करीं…? देख भइयवा, ई कुल जेतना हमरे कौम के हैंन, सब झाड़ू चलइहें। एमा कौनो दू राय नहीं हौ।

    मोंछू: एक कारण बतावा कि काहे झाड़ू के वोट देवे के चाही? चार-चार गो मेहरारू रखा तू लोग अउर झाड़ू टोपी लगा के ईमानदार क झांट भी बनबा?

    मौलाना: देखिए… ए… मोंछू… सुना… (मेरी ओर देखते हुए) मैं पहली बार आपको साफ-साफ बता रहा हूं कि मुसलमान अरविंद केजरीवाल को वोट क्‍यों करेगा। लिख लीजिए… अबही ले हमहन कई गलती कइली… आजादी के एतने साल में कौन हराम क जना हमहन के पुछलेस? त एक गलती और सही एदा पारी… क्‍या होगा? कुछ नहीं करेगा, यही न? ठीक है…

    मोंछू (दांत पीसते हुए): गलतिये करे के ह त मोदीजी के संगे काहे न करता बुजरोवाले? हई भगोड़वा के संगे तोर कवन रिस्‍ता हौ?

    मौलाना: देखा भाय, सच बताई… कलिहां मोदीजी के सम्‍मान में पूरा मदनपुरा सड़क पर खड़ा रहा… पालटिक्‍स अपनी जगह, तहज़ीब भी कोई चीज़ होती है? का मोंछू… मोदी हमार मेहमान रहलन। पूरा मदनपुरा खड़ा रहा बेसब्री से कि मोदी का स्‍वागत करना है। जब अइलन, त पता चलल कि रोड शो के नाम पर गाड़ी में बइठा हैं। चेहरवो नाहीं देख पाए मियां… बतावा, हम कहां स्‍वागत करे बदे खड़ा हई अउर ई ससुर सरसरात निकल गइलन… क्‍या भाई सा‍हब (मेरी ओर देखते हुए)… गलत कह रहे हों तो बताइए…।

    मोंछू: अरे यार सब छोड़ा… ई बतावा अपने परिवार में से एक वोट मोदी के दियइबा की नाहीं?
    (मैं हंसने लगा)

    मोंछू: हंसिए मत… हम लोगों की दोस्‍ती 22 साल पुरानी है… कहो, जावेद?
    (मौलाना का नाम जावेद था, अब पता चला)

    जावेद: हां भयवा… (मेरी ओर देखते हुए)… हम लोग एक साथ सुख-दुख में रहे हैं। हमरे इहां कुछ हो जाए त मजाल है कि मोंछू न आवें?

    मोंछू: सुना… कोई मोदी-फोदी हमहन क व्‍यवहार नाहीं खराब कर सकत… मत देवे क ह मत दा वोट… आपन आपन नजरिया हौ… मैं अपना काम कर रहा हूं, ये अपना काम करेंगे। सबसे ऊपर व्‍यवहार है, बाकी तो सब पालटिक्‍स है।
    (इसके बाद मौलाना ने मोंछू को गले लगाया और चलने को उठे)

    मोंछू: अइसन का नाराजगी… एक ठे पनवा बंधवा ला…

    जावेद: जल्‍दी करा… जाए के है…

    मोंछू: काहे? दुसरकी जोहत ह का?

    जावेद: अइसन मत बोला भाय… ई सब पुरानी बात हो गई। अब हम लोग उतने जाहिल नहीं हैं।

    मोंछू: लग गल मरचा… तुम लोग देस को पेल-पेल के आबादी बढ़ाए जा रहे हो और टोपी पहिन के ईमानदार बनने चले हो… 

    (जावेद ने एक पान दबाया, एक बंधवा लिया)

    जावेद: जात हई, कल केजरीवाल क रैली ह…

    मोंछू: हूं… जा… मरवावा झाड़ू से…।

    (जावेद स्‍कूटर स्‍टार्ट करते हुए)

    जावेद: पहिली बार झाड़ू से मरवाइब… तू त 20 साल से कमल से मरवावत हउवा… का मिलल? झांट?

    (पहिला गियर लगाते हुए जावेद)

    मोंछू: अउर का मिली… मोदी आवें चाहे केजरीवाल… बरक्‍कत होवे के चाही बस… याद हौ ऊ सेरवा जावेद?

    जावेद: कवन? आबो-हवा वाला?

    मोंछू: हां…

    (जावेद एक्सिलेटर लेते हुए)

    मोंछू: आबो-हवा के असर से चिंघुरा हुआ हूं मैं…

    (मैंने कहा मुकर्रर, तो मोंछू रुक गए)

    जावेद: आबो-हवा के असर से चिंघुरा हुआ हूं मैं…

    मोंछू: तुम क्‍या समझ रहे हो सुधरा हुआ हूं मैं?    

    दुकान पर खड़ा तीसरा व्‍यक्ति: बारज्‍जा… गजब सेर मरला चच्‍चा…

    जावेद: एह… सुना… शेर पढ़ा जाता है… मारा नहीं जाता… शेर हमारा मेहमान है।

    मोंछू: ई कइला न बात कायदे क…

    (जावेद ने क्‍लच छोड़ा, दुकान पर ठहाका)