अब इलियास अकेला था। उसने उस तंग अँधेरी कोठरी का निरीक्षण किया – निकलने की कोई गुंजाइश नहीं है। उसे लगा, जैसे बोतल के अन्दर किसी मक्खी को बन्द कर दिया गया हो। हथकड़ी अब भी लगी थी। वह चुपचाप फर्श पर बैठ गया और सोचने लगा। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पुलिस को कैसे मीटिंग वाली जगह का पता चला। साथियों ने पूरी एहतियात बरती थी, फिर भी यह कैसे हो गया? उसे उम्मीद थी कि ब्यूक्स ज़रूर बच गया होगा। कमरे के बाहर गोली चलने की आवाज़ सुनायी दी थी, लेकिन ब्यूक्स बच ही गया होगा। अगर वह पकड़ा गया होता तो खुफ़िया अधिकारी उसे भी अब तक यहाँ पहुँचा दिये होते। अब तक सब तितर-बितर हो गये होंगे ओर ब्यूक्स अगर बचा होगा तो भी उसे काम करने में काफी दिक्कत होगी।
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