बहनो! साथियो!
अपनी सुरक्षा घरों की चारदीवारियों में कैद होकर नहीं की जा सकती।
बर्बरता वहाँ भी हम पर हमला कर सकती है,
रूढ़ियाँ हमें तिल-तिलकर मारती हैं वहां
अँधेरा हमारी आत्मा के कोटरों में बसेरा बना लेता है।
हमें बाहर निकलना होगा सड़कों पर
और मर्दवादी रुग्णताओं-बर्बरताओं का मुकाबला करना होगा।
The post अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस (8 मार्च) पर appeared first on मज़दूर बिगुल.
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