‘इस हैबते हालात पे कुछ ग़ौर कीजिये, अब भी तो ख़ौफ़ छोड़िये आवाज़ दीजिये।
ग़म की नहीं ग़ुस्से की सदा बनके मेरे दोस्त, ख़ामोशियों को तोड़िये, आवाज़ दीजिये।’
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‘इस हैबते हालात पे कुछ ग़ौर कीजिये, अब भी तो ख़ौफ़ छोड़िये आवाज़ दीजिये।
ग़म की नहीं ग़ुस्से की सदा बनके मेरे दोस्त, ख़ामोशियों को तोड़िये, आवाज़ दीजिये।’
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