अगर आँकड़ों की बात की जाये तो पूरी दुनिया में इस अमानवीय धन्धे का बिजनेस 1.2 अरब डालर यानि 60 अरब रुपए प्रति वर्ष से ऊपर का है। मानवीय अंगों की तस्करी में सबसे ज़्यादा गुर्दों की तस्करी होती है क्योंकि हरेक आदमी में दो गुर्दे होते हैं और आदमी एक गुर्दे के साथ भी ज़िन्दा रह सकता है। इसके बाद जिगर का नम्बर आता है क्योंकि जिगर एक ऐसा अंग है जो अगर कुछ हिस्सा ख़राब हो जाये या काटकर किसी और को लगा दिया जाये तो यह अपने को फिर से पहले के आकार तक बड़ा कर लेता है। इसके अलावा आँख की पुतली, चमड़ी तथा दिल, तथा फेफड़े के क्रय-विक्रय का धन्धा भी चलता है। पूरी दुनिया में हर वर्ष 66,000 गुर्दा बदलने, 21,000 जिगर बदलने के और 6,000 दिल बदलने के आपरेशन होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबक इनमें से 10 प्रतिशत आपरेशन तो गैर-क़ानूनी होते ही हैं। एक अन्य अध्ययन के अनुसार अंग-बदलने के आपरेशनों में इस्तेमाल हुए मानवीय अंगों में से लगभग 42 प्रतिशत मानवीय अंगों की तस्करी के कारोबार से हासिल किये होते हैं। वर्ष 2007 में, अकेले पाकिस्तान में 2500 व्यक्तियों ने अपने गुर्दे बेचे जिनमें से दो-तिहाई मामलों में ख़रीदार विदेशी नागरिक थे। वहीं भारत में भी प्रति वर्ष गुर्दा बेचने वालों की संख्या 2000 से ऊपर ही होने का अनुमान है। एक अध्ययन ने तो यहाँ तक कहा है कि हर साल 4,000 कैदियों को मार दिया जाता है ताकि 8000 गुर्दों तथा 3000 जिगर का इन्तज़ाम हो सके जिनके ज़्यादातर ग्राहक अमीर देशों के मरीज़ होते हैं।
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