वाह रे कारपोरेट मीडिया का ‘लोकतंत्र’ ! मेक्सिको के कुछ सबक

– पी. कुमार मंगलम नरेंद्र मोदी या फिर अरविंद केजरीवाल/राहुल गांधी (यहाँ कभी अगर क्रमों की अदला-बदली होती है, तो वह आखिरकार मीडिया कुबेरों के स्वार्थोँ से ही तय होती है)? आजकल अगर आप दोस्तों-रिश्तेदारों, लोकतंत्र के अपने अनुभवों का रोना रोते बुजुर्गों और अतिउत्साहित ‘नये’ वोटरों को सुनें, तो बात यहीं शुरु और खत्म […]

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