ऑर्बिट बस काण्ड के विरोध में मजदूरों और जनसंगठनों का रोष-प्रदर्शन और घेराव

12 मई 2015, लुधियाना
ऑरबिट बस काण्ड विरोधी एक्शन कमेटी, पंजाब के आह्वान पर आज पूरे पंजाब में डी.सी. कार्यालयों का घेराव किया गया और रोष प्रदर्शन किए गए। यहाँ लुधियाना में भी डेढ़ दर्जन से अधिक जनसंगठनों ने ‘एक्शन कमेटी’ के बैनर तले डी.सी. कार्यालय का घेराव किया। पहले भरत नगर चौंक पर रैली की गई। फिरोजपुर रोड पर पैदल मार्च के बाद डी.सी. कार्यालय का घेराव किया गया।
ऑरबिट बस काण्ड विरोधी संघर्ष कमेटी, पंजाब ने माँग की है कि ऑरबिट बस कम्पनी के मालिकों पर आपराधिक केस दर्ज हो, ऑरबिट बस कम्पनी के सारे रूट रद्द कर पंजाब रोडवेज को दिए जाएँ, पंजाब का गृहमंत्री सुखबीर बादल जो ऑरबिट कम्पनी के मालिकों में भी शामिल है इस्तीफा दे, इस मसले पर संसद में झूठा ब्यान देने वाली केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल भी अस्तीफा दे, समूचे बादल परिवार की जायदाद की जाँच सुपरीम कोर्ट के जज से करवाई जाए। प्राइवेट बस कम्पनियों के द्वारा स्टाफ के नाम पर गुण्डे भरती करने पर रोक लगाने, बसों की सवारियों खासकर स्त्रियों की सुरक्षा की गारण्टी करने के लिए काले शीशे और पर्दों पर पाबन्दी लगाने, अश्लील गीत, फिल्में, उँचे हौर्न से होने वाले शोर प्रदूषण पर रोक लगाने आदि माँगें भी उठाई गई। इसके साथ ही फरीदकोट में ऑरबिट बस काण्ड के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे नौजवान-छात्रों पर लाठीचार्ज व उन्हें इरादा कत्ल के झूठे आरोपों में जेल में ठूँसने की सख्त निन्दा करते हुए यह केस रद्द करने व जेल में बन्द नौजवान-छात्रों को रिहा करने की माँग उठाई गई।
रोष प्रदर्शन और घेराव के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि ऑरबिट बस कम्पन्नी द्वारा स्टाफ के नाम पर भर्ती किए गए गुण्डों द्वारा आरबिट बस में माँ-बेटी के साथ छेड़छाड़ व चलती बस से सड़क पर फेंक देने की घटना व लड़की के कत्ल के वास्तविक दोषी कम्पनी मालिक हैं। बादल परिवार की ऑरबिट बस कम्पनी समेत अन्य बस कम्पिनयों द्वारा नियम-कानूनों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और गुण्डागर्दी की जा रही है। जिस बस में यह घटना हुई उसके ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाईसेंस तक भी नहीं था। उसकी ड्राइविंग के दौरान पहले भी दो व्यक्ति मारे जा चुके हैं। इस बस के पास रूट परमिट तक नहीं था। बस में गैरकानूनी तौर पर काले शीशे और पर्दे लगे हुए थे। इसलिए ऑरबिट कम्पनी के मालिक बादल परिवार के व्यक्तियों खासकर सुखबीर बादल और हरसिमरत बादल पर भारतीय दण्ड संहित और मोटर व्हीकल कानून के तहत केस दर्ज करना बनता है। लेकिन अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर ये बचे हुए हैं। पुलिस इनकी रखेल बन चुकी है। बादल परिवार की सभी बस कम्पनियों में इसी प्रकार से नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और शरेआम गुण्डागर्दी हो रही है। ऑरबिट कम्पनी स्टाफ के नाम पर गुण्डे भर्ती करती है। एक-एक बस में पाँच-पाँच गुण्डे होते हैं जो सवारियों खासकर स्त्रियों को तंग करते हैं, सड़क पर दूसरे वाहनों के लोगों व ट्रेफिक पुलिस से दुर्व्यवहार और मारपीट करते हैं। यह पूरी तरह पंजाब सरकार पर काबिज बादल परिवार की इच्छानुसार और उनकी शह पर हो रहा है। बादल परिवार ने जो गुण्डागर्दी का माहौल बनाया है उसी का नतीजा है 30 अप्रैल को घटित हुआ मोगा ऑरबिट बस काण्ड, जिसमें तेरह वर्ष की मासूम लड़की की मौत हो गई।
वक्ताओं ने कहा कि बादलों ने अपने पैसे, राजनीतिक ताकत और गुण्डागर्दी के जरिए भले ही पीड़ित परिवार को डरा-धमकाकर चुप करा दिया हो लेकिन पंजाब के इंसाफपसंद, जुझारू, संघर्षशील मज़दूरों, किसानों, नौजवानों, विद्यार्थियों, मुलाजिमों के जनसंगठन कतई चुप नहीं बैठने वाले हैं। मसला सिर्फ एक परिवार का नहीं है बल्कि पंजाब की समूची साधारण जनता व स्त्रियों की सुरक्षा का है। सिर्फ बादल परिवार की बस कम्पनियों में ही गुण्डागर्दी नहीं होती बल्कि सभी निजी बस कम्पनियाँ ऐसी ही हैं।
वक्ताओं ने कहा कि जहाँ बस परिवहन की निजीकरण की नीति के चलते साधारण जनता की आर्थिक तौर पर बेहिसाब लूट हुई है। निजीकरण के चलते निजी कम्पनियों को अत्यधिक फायदा हुआ है वहीं जनता की जेबों पर डाका पड़ा है। बस परिवहन के निजीकरण से सबसे अधिक फायदा बादल परिवार ने उठाया है। निजी कम्पनियां जनता की आर्थिक लूट व आपसी मुकाबले में गुण्डागर्दी का सहारा लेती हैं। बादल परिवार गुण्डागर्दी में सबसे आगे है। वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक लूट और सरकारी-गैरसरकारी गुण्डागर्दी के खिलाफ़ लड़ाई आपस में जुड़ी हुई है।
वक्ताओं ने कहा कि जागती ज़मीर वाले लोग इस गुण्डा राज के खिलाफ चुप नहीं बैठ सकते। पंजाब के मज़दूरों, किसानों, नौजवानों, छात्रों, सरकारी कर्मचारियों इतियादी संगठनों के द्वारा गठित ऑरबिट बस काण्ड विरोधी संघर्ष एक्शन कमेटी, पंजाब बादल परिवार के गुण्डा राज और जनता की आर्थिक लूट के खिलाफ़ डट कर संघर्ष लड़ेगी।
आज के प्रदर्शन व घेराव को राजविन्दर (टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब), लखविन्दर (कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब), दर्शन कोहली ( भारतीय किसान यूनियन, उगराहाँ), कुलविन्दर (नौजवान भारत सभा), हरदीप सिंह मलाणा (भारतीय किसान यूनियन- ढकौंदा), महिन्दर सिंह अच्चरवाल (जमहूरी किसान सभा), प्रो. ए. के. मलेरी (जमहूरी अधिकार सभा), हरजिंदर सिंह व विजय नारायण (मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनियन), हरदेव संधु (किरती किसान यूनियन), अमरीक सिंह (पंजाब रोडवेज इम्पलाइज यूनियन (आज़ाद), अवतार सिंह रसूलपुर (ग्रामीण मज़दूर यूनियन), गुरदीप कलसी (पंजाब निर्माण मजदूर यूनियन), रमनजीत संधु (डेमोक्रेटिक इम्पलाइज फ्रण्ट), गल्लर चौहान (लोक एकता संगठन), हरबंस सिंह लोहटबद्धी (देहाती मज़दूर सभा), इकबाल सिंह (टेक्नीकल सर्विसिज यूनियन), परमजीत सिंह (एन.आर.एम.यू.), चमन सिंह (ग्रामीण मज़दूर यूनियन (मशाल), इंकलाबी केन्द्र पंजाब से कंवलजीत खन्ना आदि वक्ताओं ने सम्बोधित किया।
– जारी कर्ता,
लखविन्दर,
अध्यक्ष, कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब।
फोन नं- 9646150249
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