Blog

  • बंगलादेश हो या भारत, मौत के साये में काम करते हैं मज़दूर

    पूँजीपतियों की निगाह में मज़दूरों की जान की कोई कीमत नहीं है, लेकिन मज़दूर अपनी ज़िन्दगी को ऐसे ही गँवाने के लिए तैयार नहीं हैं। काम पर सुरक्षा का पूरा बन्दोबस्त हमारे जीने के बुनियादी अधिकार से जुड़ा है। हमें इसके लिए संगठित होकर लड़ना होगा और साथ ही इस आदमख़ेर पूँजीवादी ढाँचे को भी नेस्तनाबूद करने की तैयारी करनी होगी।

    The post बंगलादेश हो या भारत, मौत के साये में काम करते हैं मज़दूर appeared first on मज़दूर बिगुल.

  • नोएडा के निर्माण मज़दूरों पर बिल्डर माफिया का आतंकी कहर

    जिस बस्ती में मज़दूर रहते हैं उसके हालात नरकीय हैं। इस बात की कल्पना करना मुश्किल है कि टिन के शेड से बनी इस अस्थायी बस्ती में मज़दूर कैसे रहते हैं। मुर्गी के दरबों जैसे कमरों में एक साथ कई मज़दूर रहते हैं और उनमें से कई अपने परिवार के साथ भी रहते हैं। बस्ती में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। मज़दूरों को पानी खरीद कर पीना पड़ता है। बिजली भी लगातार नहीं रहती। शौचालय के प्रबन्ध भी निहायत ही नाकाफी हैं और समूची बस्ती में गन्दगी का बोलबाला है। नाली की कोई व्यवस्था न होने से बस्ती में पानी जमा हो जाता है और बरसात में तो हालत और बदतर हो जाती है। यही नहीं, जैसे ही यह प्रोजेक्ट पूरा हो जायेगा, इस बस्ती को उजाड़ दिया जायेगा और मज़दूरों को इतनी ही ख़राब या इससे भी बदतर किसी और निर्माणाधीन साइट के करीब की मज़दूर बस्ती में जाना होगा।

    The post नोएडा के निर्माण मज़दूरों पर बिल्डर माफिया का आतंकी कहर appeared first on मज़दूर बिगुल.

  • निर्माण क्षेत्र में मन्दी और ईंट भट्ठा मज़दूर

    ईंट उत्पादन में भारत दुनिया में दूसरे नम्बर पर है, 250 लाख टन कोयला की खपत के साथ देश भर में एक साल में लगभग 200 अरब ईंटे बनाने वाले इन मज़दूरों की जि़न्दगी नारकीय है। भट्ठा मज़दूर सबसे अमानवीय हालात में काम करने को मजबूर होते हैं। इनमें से अधिकतर मज़दूरों से भट्ठा मालिक गुलामो की तरह काम कराते हैं। देश भर से कईं ऐसी घटनाएँ सामने आयीं हैं जहाँ भट्ठा मालिकों ने मज़दूरों को आग में झोंककर मार दिया। न तो ईंट मज़दूरों के बच्चे पढ़ ही पाते हैं और ज़्यादातर की किस्मत में इसी उद्योग में खपना लिखा होता है। भट्ठों में बिना किसी सुरक्षा साधन या मास्क के 7000-10000 डिग्री तापमान में काम करने से मज़दूर को फेफड़ों से लेकर आँख की बीमारियाँ होती हैं। ज़्यादातर प्रवासी मज़दूर यहाँ बारिश के मौसम को छोड़कर सालभर काम में लगे रहते हैं। बच्चे से लेकर औरतें सभी को ये भट्ठे निगल जाते हैं।

    The post निर्माण क्षेत्र में मन्दी और ईंट भट्ठा मज़दूर appeared first on मज़दूर बिगुल.

  • जीवन-लक्ष्य : युवावस्था में लिखी मार्क्स की कविता

    कठिनाइयों से रीता जीवन
    मेरे लिए नहीं,
    नहीं, मेरे तूफ़ानी मन को यह स्वीकार नहीं।
    मुझे तो चाहिए एक महान ऊँचा लक्ष्य
    और, उसके लिए उम्रभर संघर्षों का अटूट क्रम।
    ओ कला! तू खोल
    मानवता की धरोहर, अपने अमूल्य कोषों के द्वार
    मेरे लिए खोल!
    अपनी प्रज्ञा और संवेगों के आलिंगन में
    अखिल विश्व को बाँध लूँगा मैं!

    The post जीवन-लक्ष्य : युवावस्था में लिखी मार्क्स की कविता appeared first on मज़दूर बिगुल.

  • ‘जाति प्रश्न और मार्क्सवाद’

    जाति व्यवस्था के ऐतिहासिक मूल से लेकर उसकी गतिकी तक के बारे में अम्बेडकर की समझदारी बेहद उथली थी। नतीजतन, जाति उन्मूलन को कोई वैज्ञानिक रास्ता वह कभी नहीं सुझा सके। इसका एक कारण यह भी था कि अम्बेडकर की पूरी विचारधारा अमेरिकी व्यवहारवाद के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी हुई थी। लिहाज़ा, उनका आर्थिक कार्यक्रम अधिक से अधिक पब्लिक सेक्टर पूँजीवाद तक जाता था, सामाजिक कार्यक्रम अधिक से अधिक धर्मान्तरण तक और राजनीतिक कार्यक्रम कभी भी संविधानवाद के दायरे से बाहर नहीं गया। कुल मिलाकर, यह एक सुधारवादी कार्यक्रम था और पूँजीवादी व्यवस्था के दायरे के भीतर ही कुछ सहूलियतें और सुधार माँगने से आगे कभी नहीं जाता था।

    The post ‘जाति प्रश्न और मार्क्सवाद’ appeared first on मज़दूर बिगुल.

  • औद्योगिक दुर्घटनाओं पर एक वृत्तचित्र

    दूर बैठकर यह अन्दाज़ा लगाना भी कठिन है कि राजधानी के चमचमाते इलाक़ों के अगल-बगल ऐसे औद्योगिक क्षेत्र मौजूद हैं जहाँ मज़दूर आज भी सौ साल पहले जैसे हालात में काम कर रहे हैं। लाखों-लाख मज़दूर बस दो वक़्त की रोटी के लिए रोज़ मौत के साये में काम करते हैं।… कागज़ों पर मज़दूरों के लिए 250 से ज्यादा क़ानून बने हुए हैं लेकिन काम के घण्टे, न्यूनतम मज़दूरी, पीएफ़, ईएसआई कार्ड, सुरक्षा इन्तज़ाम जैसी चीज़ें यहाँ किसी भद्दे मज़ाक से कम नहीं… आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं और मज़दूरों की मौतों की ख़बर या तो मज़दूर की मौत के साथ ही मर जाती है या फ़ि‍र इन कारख़ाना इलाक़ों की अदृश्य दीवारों में क़ैद होकर रह जाती है। दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, लोग मरते रहते हैं, मगर ख़ामोशी के एक सर्द पर्दे के पीछे सबकुछ यूँ ही चलता रहता है, बदस्तूर…

    The post औद्योगिक दुर्घटनाओं पर एक वृत्तचित्र appeared first on मज़दूर बिगुल.

  • एक मज़दूर की आपबीती

    मैं जितेन्द्र मैनपुरी (यू.पी.) का रहने वाला हूँ। मुझे गुड़गाँव आये 4 महीने हुए है और मैं गुड़गाँव पहली बार आया हूँ। हम अपने परिवार के तीन लोग साथ में है और तीनों एक ही फैक्ट्ररी ओरियण्ट क्रॉफ्ट, 7 पी सेक्टर-34 हीरो होण्डा चौक गुड़गाँव में चार महीने से काम कर रहे है। वैसे तो इस फैक्ट्री में कोई संगठन या एकता नहीं है। और न ही हो सकती है क्योंकि करीब 6 से 7 ठेकेदार के माध्यम से हेल्पर, कारीगर, प्रेसमैन, एक्पॉटर वगैरह भर्ती होते हैं जिनकी माँगे अलग है, काम अलग है और एक-दूसरे से कोई वास्ता नहीं है। मगर फिर भी एक छोटी सी जीत की खुशी तो होती ही है। ठीक इसी प्रकार बड़े पैमाने पर मज़दूर साथी लड़े तो हम सबकी ज़िन्दगी ही बदल जाये।

    The post एक मज़दूर की आपबीती appeared first on मज़दूर बिगुल.

  • Joint statement on the arrest of Abhay Sahoo

    We, the undersigned, are extremely appalled and outraged by the arbitrary arrest of Comrade Abhay Sahoo at Bhubaneshwar airport by Odisha Police. This despicable and patently illegal act was made to appease POSCO’s blood sucking appetite, which drains the life blood from Odisha, that is, its land, water, minerals, forests and culture. Millions of people […]

  • May 24 : Police connived with Maruti in Manesar, says PUDR

    SOURCE : NEW INDIAN EXPRESS By Harpreet Bajwa | ENS – CHANDIGARH 24th May 2013 09:41 AM Police connived with the Maruti Suzuki management in flouting the basic rights of workers at its plant in Manesar, Haryana, said a report released on Thursday by the People’s Union for Democratic Rights (PUDR), which demanded an independent […]

  • Sanhati supports the workers of Maruti Suzuki and their union

    Sanhati has issued the following statement in response to the repression unleashed by the Haryana Government. In the past several days, Haryana Government unleashed repression on the democratic protest of Maruti Suzuki workers. Sanhati condemns this repression and extends unqualified support and solidarity to the workers and the Maruti Suzuki Workers’ Union (MSWU). Many of […]