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  • शासन करने की कठिनाई

    या फिर ऐसा भी तो हो सकता है
    कि शासन करना इतना कठिन है ही इसीलिए
    कि ठगी और शोषण के लिए ज़रूरी है
    कुछ सीखना-समझना।

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  • रैनबैक्सी मामला कम गुणवत्ता वाली और नकली दवाओं के कारोबार की एक छोटी-सी झलक है!

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल 2,00,000 मौतें नकली या घटिया दवाओं के कारण होती हैं। इस आँकड़े में केवल मलेरिया और टी.बी. रोगों से पीड़ित उन मरीजों की मौतें ही शामिल हैं जिनकी मौत का कारण नकली या घटिया दवाएँ माना जा सकता है। मगर एक अध्ययन ने दिखाया है कि यह आँकड़ा भी ऐसी मौतों को बहुत कम करके देखता है। इस अध्ययन के लेखकों ने दिखाया है कि अकेले मलेरिया और टी.बी. के मामले में ही नकली या घटिया दवाओं के कारण होने वाली मृत्यु की संख्या 7,00,000 है और भी दुःख की बात यह है कि दुनिया भर में मलेरिया के कारण हर साल कुल 10 लाख लोगों की मृत्यु होती है जिसमें से 4.5 लाख घटिया या कम गुणवत्ता वाली दवाओं के कारण होती है। इस आंकडे़ से ही अन्दाज़ा लगाया जा सकता है कि अगर सब रोगों के लिए मौत का आँकड़ा लिया जाये तो नकली या घटिया दवाओं के कारण मरने वालों की संख्या कितनी हो सकती है।

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  • Anti-Aadhaar litigants and the rhetoric of fear

    By Mythri Prasad-Aleyamma A week ago, I was about to forget about my boycott of Aadhaar and get my mother to enrol so that we do not lose our cooking gas subsidy. I could easily fan my family’s suspicion and laziness for any more cards and bureaucracy by quoting Usha Ramanathan, Reetika Khera and Ramakumar, […]

  • मेहनतकश साथियो! साम्प्रदायिक ताक़तों के ख़तरनाक इरादों को नाकाम करने के लिए फ़ौलादी एकता क़ायम करो!

    इन दंगों के पीछे संघ परिवार के संगठनों की भूमिका बिल्कुल साफ है। उनका सीधा खेल है कि जितने हिन्दू मरेंगे, उतना ही हिन्दू डरेंगे और जितना ही वे डरेंगे उतना ही वह भाजपा के पक्ष में लामबन्द होंगे। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की सपा सरकार का गणित है कि मुसलमानों के अन्दर जितना डर पैदा होगा उतना ही वह समाजवादी पार्टी की ओर झुकेंगे। गुजरात में नरेन्द्र मोदी ने यही मॉडल और फार्मूला अपनाया था, और अब उत्तर प्रदेश में यही किया जा रहा है। गुजरात में नरसंहार के एक प्रमुख आयोजक और मोदी के दाहिने हाथ अमित शाह को इसी लिए उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गयी है। पिछले दिनों विहिप नेताओं के साथ मुलायम सिंह यादव की मुलाकातों और चौरासी कोसी परिक्रमा के मामले में दोनों की नूरांकुश्ती को भी इससे जोड़कर देखा जाना चाहिए।

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