Category: Asia

  • हरियाणा के नरवाना में निर्माण मज़दूरों ने संघर्ष के दम पर जीती हड़ताल

    15 तारीख़ को ही निर्माण मज़दूर यूनियन की तरफ़ से पर्चा छपवा दिया गया और सभी मज़दूरों को एकजुट करके हड़ताल करने का निर्णय लिया गया। उसी दिन यूनियन की 11 सदस्यीय कार्यकारी कमेटी का चुनाव भी कर लिया गया। पहले दिन काम बन्द करवाने को लेकर कई मालिकों के साथ कहा-सुनी और झगड़ा भी हुआ, किन्तु अपनी एकजुटता के बल पर यूनियन ने हर जगह काम बन्द करवा दिया। 16 तारीख़ को यूनियन ने नौभास और बिगुल मज़दूर दस्ता की मदद से पूरे शहर में पर्चा वितरण और हड़ताल का प्रचार किया। मज़दूरों के संघर्ष और जुझारू एकजुटता के सामने 16 तारीख़ को ही दोपहर में मालिकों यानी भवन निर्माण से जुड़ी सामग्री बेचने वाले दुकानदारों ने हाथ खड़े कर दिये। मज़दूरी में किसी सामग्री में 100 तो किसी में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई। जैसे पहले सीमेण्ट का एक कट्टा 1.25 से 1.50 रुपये तक में उतारा और लादा जाता था, हड़ताल के बाद इसका रेट न्यूनतम 2.50 रुपये तय हुआ। रेती की ट्राली उतारने और लादने का रेट 60-70 से बढ़कर 130 रुपये न्यूनतम तय हुआ।

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  • मज़दूरों के लिए “अच्छे दिन” शुरू, भाजपा द्वारा श्रमिकों के अधिकारों पर पहला हमला

    पूँजीपतियों की लगातार कम होती मुनाफ़े की दर और ऊपर से आर्थिक संकट तथा मज़दूर वर्ग में बढ़ रहे बग़ावती सुर से निपटने के लिए पूँजीपतियों के पास आखि़री हथियार फासीवाद होता है। भारत के पूँजीपति वर्ग के भी अपने इस हथियार को आज़माने के दिन आ गये हैं। फासीवादी सत्ता में आते तो मोटे तौर पर मध्यवर्ग (तथा कुछ हद तक मज़दूर वर्ग भी) के वोट के बूते पर हैं, लेकिन सत्ता में आते ही वह अपने मालिक बड़े पूँजीपतियों की सेवा में सरेआम जुट जाते हैं। राजस्थान सरकार के ताज़ा संशोधन इसी का हिस्सा हैं।

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  • बैक्सटर मेडिसिन कम्पनी में यूनियन बनाने के लिए मज़दूरों का संघर्ष!

    गुड़गाँव के आईएमटी मानसेर में दवा कम्पनी बैक्सटर मेडिसिन ने 27 मई 2014 को बिना किसी पूर्व सूचना के ‘ए’ शिफ्ट में ड्यूटी पर आये मज़दूरों में से 17 नेतृत्वकारी मज़दूरों को निलम्बन का पत्र पकड़ा दिया। कम्पनी की तानाशाही के खि़लाफ़ मज़दूरों ने संघर्ष का रास्ता चुना और अपने बाहर निकाले गये साथियों की बहाली के लिए एकजुट होकर प्रशासन के दरवाज़े पर दस्तक दी।

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  • नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं निर्माण उद्योग में काम करने वाले मज़दूर

    इस क्षेत्र में काम करने वाली मज़दूर आबादी ठेके पर बेहद कम मज़दूरी पर तथा बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के अमानवीय जीवन जीने को मजबूर है। कार्यस्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इन्तज़ाम न होने के कारण हर दिन मज़दूरों के साथ कोई न कोई दुर्घटना होती रहती है, जिनमें कई बार उन्हें अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ता है। इसके अलावा हर समय धूल-भरे वातावरण में काम करने के कारण, आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के अभाव, और आस-पास फैली गन्दगी के कारण मज़दूरों को कई जानलेवा बीमारियाँ अपना शिकार बना लेती हैं। लेकिन चूँकि मज़दूरों को अलग-अलग ठेकेदारों के माध्यम से काम पर रखा जाता है, और उनके पास रोज़गार सम्बन्धी कोई भी रिकॉर्ड नहीं होता है। इसलिए अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो मालिक और ठेकेदार पुलिस के साथ मिल मज़दूर के परिवार को डरा-धमकाकर या थोड़ी सी रक़म देकर पूरे मामले को वहीं ख़त्म कर देते हैं।

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  • रिलायंस की गैस का गोरखधन्धा

    जब दुनिया में कहीं भी गैस की उत्पादन लागत 1.43 डॉलर से ज़्यादा नहीं है तो रिलायंस को इतनी ऊँची दर क्यों दी जा रही है। इतना ही नहीं, 2011 में नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस बिना कोई कुआँ खोदे ही पेट्रोलियम मिलने के दावे करती रही। रिलायंस को पता ही नहीं था कि उसके पास कितने कुओं में कितनी गैस है। दूसरे, रिलायंस को केजी बेसिन के केवल एक चौथाई हिस्से पर काम करना था, लेकिन पीएसी कॉण्ट्रैक्ट के ख़ि‍लाफ़ जाकर रिलायंस ने समूचे बेसिन में काम शुरू कर दिया और सरकार ने इसमें कोई टोका-टाकी तक नहीं की।

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  • An Appeal to all justice-loving citizens and workers

    They wish to break the workers through hunger. But these steel workers are holding on; they are fighting even with half-filled stomach to secure their legitimate, legal and constitutional rights. Are they demanding anything unjust? No! They are just demanding their lawful rights and are fighting for them even with half-filled stomach. Many workers’ households have begun to face severe food crisis. In order to tackle this situation the ‘Garam Rolla Mazdoor Ekta Samiti’ is starting a community kitchen from Saturday 21 June onwards. We are determined not to let the strike broken under any circumstance.

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  • सभी इंसाफ़पसन्द नागरिकों और मज़दूरों के नाम एक अपील

    सभी इंसाफ़पसन्द नागरिकों और मज़दूरों के नाम एक अपील
    मज़दूरों के बहादुराना संघर्ष को आपकी ज़रूरत है!
    साथियो!
    शायद आपको पता हो कि दिल्ली के बीचों-बीच वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में गरम रोला पर काम करने वाले इस्पात मज़दूर पिछले 15 दिनों से गरम रोला मज़दूर एकता समितिके नेतृत्व में हड़ताल पर हैं। ये मज़दूर भयंकर ख़तरनाक स्थितियों में काम करते हैं और पिछले लम्बे समय से न्यूनतम मज़दूरी, ईएसआई, पीएफ़ आदि जैसे अपने कानूनी हक़ों की माँग कर रहे हैं। इन मज़दूरों की ज़बर्दस्त साहसिक हड़ताल के कारण वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र के गरम रोला कारखाने ठप पड़े हैं। श्रम विभाग इन कारखानों में श्रम कानूनों के उल्लंघन से लम्बे समय से वाक़ि‍फ़ रहा है, लेकिन इस हड़ताल के बाद पड़े दबाव के बाद ही वह कुछ हरक़त में आया है।
    इस हड़ताल को तोड़ने के लिए कारखाना मालिकों ने पहले नेतृत्व के मज़दूरों पर झूठे केस दर्ज़ कर उन्हें गिरफ्तार करवाने की कोशिश की। जब वे उसमें सफल नहीं हो पाये तो फिर उन्होंने तमाम किस्म के दलालों, ठेकेदारों, छुटभैये नेताओं, और ग़द्दार ट्रेड यूनियनों द्वारा अफ़वाहें फैलाकर हड़ताल को तोड़ने का प्रयास किया। और उसमें भी मुँह की खाने के बाद अब वे इस हड़ताल को तोड़ने के लिए अपने सबसे बड़े हथियार का सहारा ले रहे हैंभूख! वे मज़दूरों को भूख से तोड़ना चाहते हैं। लेकिन ये इस्पात मज़दूर डटे हुए हैं; आधा पेट खाकर भी लड़ रहे हैं, ताकि उनके जायज़, कानूनी और संवैधानिक हक़ उन्हें मिल सकें। क्या वे कुछ ग़लत माँग रहे हैं? नहीं! वे तो बस अपने कानून-प्रदत्त अधिकार माँग रहे हैं और इसके लिए आधे पेट भी लड़ रहे हैं। कई मज़दूरों के घर खाने का भयंकर संकट पैदा हो चुका है। इस समस्या से निपटने के लिए गरम रोला मज़दूर एकता समितिशनिवार (21 जून) से सामुदायिक रसोई की शुरुआत कर रही है। हम किसी भी हालत में हड़ताल को टूटने नहीं देंगे।
    ऐसे में, हम सभी इंसाप़फ़पसन्द नागरिकों, शिक्षकों, जनपक्षधर बुद्धिजीवियों और मज़दूर साथियों से अपील करेंगे कि हड़ताल को जारी रखने के लिए अधिकतम सम्भव धनराशि, राशन, मिट्टी का तेल, आदि सहयोग स्वरूप दें। सभी जनपक्षधर लोगों की राजनीतिक एकजुटता के ज़रिये ही यह लड़ाई लड़ी जा सकती है। हम उम्मीद करते हैं ऐसे लोगों की इस देश में कमी नहीं है।
    क्रान्तिकारी अभिवादन के साथ,
    आपके सहयोग के इन्तज़ार में,
    रघुराज, सनी
    (सदस्य, लीडिंग कोर)
    गरम रोला मज़दूर एकता समिति
    किसी भी प्रकार का सहयोग देने के लिए इन फोन नम्बरों पर फोन करेंः
    रघुराज – 9211532753, सनी – 9873358124
    धनराशि आप निम्न अकाउण्ट में भी भेज सकते हैं:
    खाताधारक – मनोज कुमार,
    खाता सं- – 32732928188,
    IFSC सं- – SBIN001135
    शाखा – शालीमार बाग, दिल्ली
    पुनश्चः आन्दोलन से जुड़ी सूचनाओं, खबरों और रिपोर्टों के लिए आप निम्न ब्लॉग चेक कर सकते हैं :
  • आग उगलती गर्मी में भी श्रीराम पिस्टन के मज़दूरों का संघर्ष जारी!

    भिवाड़ी स्थित श्रीराम पिस्टन एण्ड रिंग्स के मज़दूर पिछले 15 अप्रैल से अपनी लम्बी हड़ताल जारी किये हुए है। लगभग 60 दिनों से आग उगलती गर्मी में मज़दूर पहले 10 दिन फ़ैक्टरी के अन्दर डेरा जमाये हुए थे और फिर 26 अप्रैल को कम्पनी में हुए बर्बर लाठीचार्ज के बाद कम्पनी गेट पर बैठे हुए हैं। ज्ञात हो कि इस दमन की कार्रवाई में राजस्थान पुलिस ने 26 नेतृत्वकारी मज़दूरों को ज़बरदस्ती गिरफ़्तार करके उन पर हत्या के प्रयास व अन्य कई गम्भीर धाराएँ लगी दीं। फिर भी मज़दूरों ने बर्बर दमन के खि़लाफ़ अपना संघर्ष जारी रखा।

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  • Coca-Cola’s license for Mehdiganj plant cancelled for water and land pollution

    COurtesy: India Resource Centre

    Varanasi, India: Coca-Cola’s bottling plant has been shut down by state government authorities in Mehdiganj in the state of Uttar Pradesh in India.

    The Uttar Pradesh Pollution Control Board (UPPCB) ordered the plant to shut down because it found the company to be violating a number of conditions of its license, or “No Objection Certificate” (NOC).

    The Pollution Control Board, in its order dated June 6, 2014 (which we obtained yesterday), noted that Coca-Cola had failed to obtain clearance to extract groundwater from the Central Ground Water Authority (CGWA), a government agency that monitors and regulates ground water use in water-stressed areas.

    Coca-Cola Factory in Mehdiganj Credit: India Resource Center

    Coca-Cola Factory in Mehdiganj
    Credit: India Resource Center

    The groundwater in Mehdiganj has gone from “safe” category in 1999 when Coca-Cola started operations to “critical” in 2009, according to the CGWA. As a result, more ground water use restrictions are in place, including on ground water use by farmers and the community for drinking water.

    The closure is a major victory for the community in Mehdiganj which has actively engaged the UPPCB, CGWA and other government agencies to shut down Coca-Cola’s plant. The campaign had also alerted the government to Coca-Cola’s failure to meet a key condition of a temporary license given to it – obtaining the clearance from the CGWA. The campaign, which enjoys widespread local support, had also sent letters from 15 village councils (panchayat) in April 2013 seeking closure of Coca-Cola’s plant.

    For background on Mehdiganj and for more information visit www.IndiaResource.org

     

     

  • एहरेस्टी के मज़दूरों की एकजुटता तोड़ने के लिए बर्बर लाठीचार्ज

    मज़दूरों की एकजुटता को तोड़ने और प्लाण्ट ख़ाली करवाने के लिए कम्पनी ने 31 मई को हरियाणा पुलिस से साँठगाँठ कर मज़दूरों पर बर्बर लाठीचार्ज करवाया, जिसमें 30 से ज़्यादा मज़दूरों को गम्भीर चोटें आयी हैं। इस बर्बर दमन ने साफ़ कर दिया है कि चाहे भाजपा की वसुन्धरा सरकार या कांग्रेस की हुड्डा सरकार, वे तो बस पूँजीपतियों के हितों को सुरक्षित करने का काम कर रहे हैं। 

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