हड़ताल मजदूर वर्ग का एक ऐसा जबर्दस्त हथियार है जिसकी ताकत के दम पर वह मालिक वर्ग को अपनी व्यवहारिक माँगों को पूरा करने के लिए घुटने टेकने को मजबूर कर देता है। 1990 के दशक से जारी निजीकरण-उदारीकरण की नीतियों के साथ-साथ मालिक वर्ग ने ऐसे एक खास तरीके की रणनीति तैयार की है जिससे कि किसी एक फ़ैक्टरी में हड़ताल होने से उनकी सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता। वो तरीका है एक बड़े कारखाने को सौ छोटे कारखानों में बाँट देना। ऐसी ही एक फ़ैक्टरी हड़ताल की घटना हमारे सामने है जो हड़ताल के बारे में कुछ जरूरी सबक देती है।
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