ज़ोर है कितना दमन में तेरे-देख लिया है, देखेंगे!

श्रीराम पिस्टन के मालिकान, प्रबन्धन और भाड़े के गुण्डे भिवाड़ी के मज़दूरों के आन्दोलन से डर गये हैं। उन्हें लग रहा है कि मज़दूर जाग रहे हैं और इंसाफ़ की लड़ाई को फैलने से रोकना होगा। यही कारण है कि श्रीराम पिस्टन के मालिकों ने 5 मई को मज़दूर कार्यकर्ताओं पर यह कायराना हमला करवाया है। दूसरी बात, मज़दूरों पर पूँजीपतियों की नंगी तानाशाही कायम करने के काम में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकार और पुलिस पूरी तरह से पूँजीपतियों के साथ है। मज़दूरों के लिए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उत्तर प्रदेश की सपा सरकार हो, राजस्थान की भाजपा सरकार हो या फिर हरियाणा की कांग्रेस सरकार हो। उनके लिए किसी भी सरकार का अर्थ यही हैः पूँजी की बर्बर और नग्न तानाशाही! तीसरी बात, भिवाड़ी के मज़दूरों पर हमले ने भिवाड़ी के बहादुर मज़दूर साथियों के संघर्ष को और मज़बूत किया था और यह ताज़ा हमला भी मज़दूरों के हौसले को और बुलन्द कर रहा है।

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