मारुति सुजुकी यूनियन चुनाव में जीत शोषण-दमन के खिलाफ हमारे अथक संघर्ष की जीत है !

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MARUTI SUZUKI WORKERS UNION

(Registration No. 1923)

IMT Manesar, Gurgaon

 

 

Ref. No…MNR/4/14                                                               Date… 11/04/2014

 

प्रेस विज्ञप्ति

आज दोपहर 3 बजे मानेसर में मारुति सुजुकी कंपनी गेट के सामने हमारी गेट मीटिंग संपन्न हुई| इस साथ हमने अपना यूनियन बनाने का अधिकार और हम मजदूरों की सामूहिक शक्ति को दोबारा स्थापित किया| लगभग 3000 मजदूर इस गेट मीटिंग में शामिल हुए जिसमे इसको नई मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन (MSWU) सदस्यों के साथ सुजुकी पावरट्रेन इंडिया एम्प्लोयिज़ यूनियन (SPIEU) व सुजकी मोटरसाइकिल इंडिया एम्प्लोयिज़ यूनियन (SMIEU) के मजदूर ने अपनी बात रखी| MSWU के नए सदस्यों ने कहा कि प्रबंधन को द्वेष की भावना को छोड़, संघर्षरत मजदूरों के मांगो के ऊपर ध्यान देना चाहिए| ताकत की एक लहर ने घोषणा की कि डर के राज को हमने ख़तम किया जिसको मालिक-प्रबंधन ने हम पर थोपा था| 4अप्रेल के चुनाव और यूनियन के पुनर्गठन के बाद, आज की सभा ने हमारे शोषण-दमन के खिलाफ़ अथक संगर्ष को कायम रखने का एलान किया|

हमने 4अप्रेल के यूनियन चुनाव में 12 में से 11 सिटो पर तथा 80% के मार्जिन से प्रबंधन के द्वारा कठपुतली पैनल के खिलाफ जीत हासिल की| प्रोविजोनल वर्किंग कमेटी, MSWU के कामरेड रामनिवास ने कहा कि “यह पिछले दो साल कंपनी प्रबंधन-सरकार-प्रशासन-पुलिस की मिलिभगत से चलायी गयी शोषण-दमन के चक्र के खिलाफ जीत हैं|” यह जीत 4जून 2011 से चले आ रहे संघर्ष का ही नहीं, बल्कि खासकर 18जुलाई 2012 से चले अथक संघर्ष का नतीजा हैं| 20 महीने से ज्यादा हो चुका है कि 147 मजदूर आज भी जेल की सलाखों के पीछे कैद है, जिनकी अभी तक ज़मानत भी नहीं हुई हैं| यह भारत के अपराधिक क़ानूनी व्यवस्था के ऊपर एक काला धब्बा है| 546 पक्के मजदूरों के साथ 1800 ठेका मजदूर को बिना जांच नौकरी से निकाल दिया गया है, जो आज बेरोजगार है| हमारे अधिकारों को कुचलने के लिए कंपनी मालिक-प्रबंधन-सरकार-पुलिस सहित पुरी व्यवस्था आज एकजुट है, की “मजदूरों को एक सबक सिखाया जाए”| यह तक की कोर्ट ने भी हमे “विदेशी पूंजी निवेश को घटा पहुचाने” के जुर्म के लिए दोषी ठेहेराया| हमने तो बस मजदूर के बतौर अपने सम्मान, यूनियन बनाने का अधिकार, व ठेका मजदूरों के अधिकार की मांग की| पिछले दो साल में हमने जेल में बंद सभी मजदूरों को रिहा करने, सभी बर्खास्त मजदूरों को काम पर वापस लेने और त्रिपक्षीय समझौते की मांग की| और इन मांगो के लिए, हमने अपनी एकता कायम रखने की जुर्रत की|

मारुति प्रबंधन ने इस चुनाव में मजदूरों को डरा धमका कर, पुरे प्रक्रिया को अपने हित में मोड़ने की कोशिश की| उसने हर तरीके के षड्यंत्र से पक्के और ठेका में, विभिन्न इलाको में, विभिन्न प्लांटो में, मजदूरों की एकता तोड़ने की कोशिश की| 2300 मजदूरों को बेरोजगार करने के बाद, प्रबंधन ने डर और दंड का ऐसा माहौल तय्यार किया जिससे नए मजदूर उससे दबकर रहे| इन नए मजदूरों को निकाले गए मजदूरों और संघर्षरत मजदूरों व युनिअनो के साथ बात तक करने की इजाजत नहीं थी| उन्होंने अपने पक्षपाती 250 मजदूरों का गुडगाँव प्लांट से मानेसर प्लांट में तबादला किया| उन्होंने जेल में बंद व बर्खास्त मजदूरों को यूनियन के संविधान के विपरीत मताधिकार के वंचित करने का पूरा प्रयास किया, जिसका श्रम विभाग ने अनुसरण किया| किसी भी मजदूर ने अगर इसके खिलाफ पर्चा बाटने की कोशिश की, उसको पुलिस के द्वारा प्रताडि़त किया गया| और चुनाव में अपने चहेते उमीदवार खड़े कर दिए और मजदूरों को पूरी तरह दबाने की कोशिश की|

इन फुट डालो- राज करो, दमन और भय की नीतियों के बावजूद हम कामयाब हुए| जेल में बंद और बर्खास्त मजदूरों के जोरदार समर्थन और सहयोग से, संघर्षरत मजदूर 12 में से 11 सिट जीते| 4अप्रेल की शाम एक एसी शाम थी जब मजदूरों ने फेक्टरी में फिर से अपना हक़ हासिल किया| दो साल बाद, फेक्ट्री के सामने सड़क पर फिर से ख़ुशी और जश का माहौल था| नारा लगाते हुए अन्दर कार्यरत मजदूर अपनी कंटीन से बर्खास्त मजदूरों के लिए खाना लेकर बाहर आए, और उन्होंने कहा कि अभी संघर्ष ख़तम नहीं हुआ हैं, जब तक बर्खास्त और गिरफ्तार साथीयों का संघर्ष पूरा नहीं होता|

यहा सुजुकी पावरट्रेन इंडिया एम्प्लोयिज़ यूनियन (SPIEU) व सुजकी मोटरसाइकिल इंडिया एम्प्लोयिज़ यूनियन (SMIEU) के युनिअनो का जिक्र करना जरुरी है, जिन्होंने इस क्षेत्र में मजदूरों के सामूहिक संघर्ष की सम्भावना को फिर से खोला है| SPIEU के मजदूरों ने अपने प्रबंधन को चेताया की अगर मारुति सुजुकी चुनाव में धान्द्ली की गयी, तो वे हड़ताल पर चले जायेंगे| आज के गेट मीटिंग में सुजुकी पावरट्रेन के कामरेड अनिल और मोटरसाइकिल के कामरेड अनिल ने फिर से मजदूरों की एकता और सहयोग को मज़बूत करने का आह्वान किया, और इसको पुरे गुडगाँव-मानेसर-धारूहेड़ा-बावल के मजदूरों की एकता बताया|

हम मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन की नई समिति का स्वागत करते हैं: प्रधान – पवन कुमार; महासचिव – संजय कुमार; मुख्य संरक्षक – मनोज कुमार; उप प्रधान – धरमेंदर कुमार; सचिव – नवीन कुमार; कोषाध्यक्ष – जितेंदर कुमार; संगठन सचिव – अमित चौधरी; क़ानूनी सलाहकार – सौरभ जैन; कार्यकारिणी सदस्य : राजेंद्र, संदीप, संजीव, राजकुमार|

इस जीत के साथ हम संघर्ष के एक नए चरण में दाखिल हो चुके है| यह जीत केवल मारुति सुजुकी के मजदूरों की जीत नहीं हैं, बल्कि सभी संघरशील मजदूरों की जीत है, जो कही भी शोषण-दमन के खिलाफ अपने सम्मान और सामूहिक शक्ति के लिए लड़ रहे है|

 

इंकलाब जिंदाबाद!

मजदूर एकता जिंदाबाद!

 

(रामनिवास, महाबीर, राजपाल, योगेश, कटार)

प्रोविजोनल वर्किंग कमिटी

मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन

 

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